Wednesday, June 18, 2008

मोहब्बत..............

मोहब्बत का इरादा अब बदल जाना भी मुश्किल है,तुझे खोना भी मुश्किल है, तुझे पाना भी मुश्किल है।जरा सी बात पर आंखें भिगो के बैठ जाते हो,तुझे अब अपने दिल का हाल बताना भी मुश्किल है,उदासी तेरे चहरे पे गवारा भी नहीं लेकिन, तेरी खातिर सितारेतोड़ कर लाना भी मुश्किल है,यहाँ लोगों ने खुद पे परदे इतने डाल रखे हैं,किस के दिल में क्या है नज़र आना भी मुश्किल है,तुझे ज़िन्दगी भर याद रखने की कसम तो नहीं ली,पर एक पल के लिए तुझे भुलाना भी मुश्किल ...........

3 comments:

पी के शर्मा said...

ब्‍लोगल वार्मिंग में आपका हार्दिक स्‍वागत है।
वैसे इस संसार में कुछ भी मुश्किल नहीं होता।
मन में इरादा तो हो।

jasvir saurana said...

aagar mohabbat hui he to kuch bhi namumkin nahin,vaise apki kavita ak pyara sa ahsash he......welcome in blogworld....plz remove word verification.

Udan Tashtari said...

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.

-समीर लाल